Sat 13 Mar 2010 |
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इलाहाबाद हाई स्कूल सोसाइटी की स्थापना सन् १८६१ इ में हुई थी तथा इसका पंजीकरण स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में सन् १८८८ ई में हुआ था. यह सोसाइटी वर्तमान समय में अपने दायित्वओ का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर रही है. इलाहाबाद शहर में सोसाइटी चार शैक्षिक संस्थाओ का सकुशल प्रबंधन करते हुए संचालित कर रही है - अ) ब्वायज़ है स्कूल (बी एच एस) एवं कॉलेज जिसका जूनियर सेक्शन होली ट्रिनिटी स्कूल (एच टी एस) के नाम से है. ब) गर्ल्स हाई स्कूल (जी एच एस) एवं कॉलेज तथा स) मेरी लुकस स्कूल (एम एल एस) एवं कॉलेज.
सोसाइटी के संशोधन में छेड़छाड़ संबंधी आरोप पूर्णतः आधारहीन है , क्योंकी संशोधन सन् २००४ से प्रस्तावित थे. इन संशोधनो पर लगभग तीन वर्षो तक विचार-विमर्श एवं समीक्षात्मक विवेचना के उपरांत ही संशोधन किया गया है. उक्त सभी संशोधन सोसाइटी की नियमावली एवं सोसिटीज़ एक्ट १८६१ में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार क्रियान्वित करते हुए संशोधित किए गये हैं. सोसाइटी के सदस्य एवं पदाधिकारी जो संशोधन के पूर्व थे वही संशोधन के पश्चात आज भी है. दिनांक २८-०५-२००७ के संशोधन के पश्चात सभी सदस्यो को समानाधिकार प्रदान किए गये है. प्रदेन सदस्यता का प्रावधान समाप्त करने का उदेश्य सोसाइटी द्वारा भारतीय संविधान के समता मूलक सिद्धांत को आत्मसात् करना है. यह सभी संस्थाए यहाँ के विद्यार्थियों तथा इलाहाबाद के नागरिको की धरोहर है, न की बिशप / अध्यक्ष, जो की चर्च / सोसाइटी के सदस्य है, के एकाधिकार में है. इन संशोधनो के मध्यम से सोसाइटी ने एक जिम्मेदार प्रबंधन के रूप में संस्थाओ की चल एवं अचल सम्पत्तियो की रक्षा एवं सुरक्षा का दायित्व सकुशल निभाने का प्रयास किया है ताकि इन संस्थाओ के संसाधनों का शिक्षा के क्षेत्र के अलावा किसी भी अन्य कार्य के लिए दुरुपयोग की संभावना न रह सके. बिशप मॉरिस ई दान सोसाइटी के सदस्य नही है तथा उन्हे संशोधन की प्रक्रिया तथा संस्थाओ के प्रशासन से संबंधित कोई जानकारी भी नहीं है, इस प्रकार उनके द्वारा लगाए गये सभी आरोप आधारहीन, नकली एवं मनगढ़न्त है जिनका उदेश्य आम लोगों में भ्रम उत्पन्न करके इन संस्थाओ में अस्थिरता पैदा करना है. उनके इस निराशाजनक कृत्य का मुख्य उदेश्य नियमो के विपरीत, अन्यायपूर्ण तरीक़ो से सोसाइटी एवं संबंधित संस्थाओ के पदाधिकारिओ की छवि धूमिल करके, इनके शिक्षको, छात्रो एवं अभिभावको तथा आम जनता को गुमराह करना है. यह अत्यंत ही शर्मनाक बात है की बिशप जैसे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के द्वारा सोसाइटी के जिम्मेदार पदाधिकारिओ के खिलाफ झूठी पोलीस रिपोर्ट एवं कोर्ट केस करके इन संस्थाओ के धन का अपने निहित स्वार्थो के लिए दुरुपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है.
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